असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 6 फरवरी को कहा कि ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विद्यार्थियों का पारंपरिक ‘गमोसा’ पहनाकर स्वागत किए जाने से असम के GI-टैग्ड हथकरघा को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर बड़ी पहचान मिली है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल गमोसा के सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व को उजागर करती है। गमोसा असम की पारंपरिक पहचान है, जिसे राज्यभर में लाखों महिला बुनकरों द्वारा हाथ से बुना जाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा सार्वजनिक मंचों पर गमोसा के निरंतर उपयोग से विशेषकर युवा पीढ़ी के बीच इस हथकरघा को व्यापक पहचान मिली है।
इस अवसर को असम की सांस्कृतिक विरासत के सम्मान का प्रतीक बताते हुए सरमा ने कहा कि प्रधानमंत्री की यह सराहना गमोसा को असमिया गौरव के स्थायी प्रतीक के रूप में और मजबूत करती है तथा इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों तक ले जाती है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रतीकात्मक कदम राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती देते हैं और स्वदेशी शिल्प के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री का असम के प्रति स्नेह केवल सांस्कृतिक प्रतीकों तक सीमित नहीं है, बल्कि विकास परियोजनाओं और बड़े पैमाने की योजनाओं के जरिए राज्य के साथ उनके निरंतर जुड़ाव में भी झलकता है। उनके अनुसार, इससे बुनकर समुदाय, विशेषकर महिला कारीगरों में आत्मविश्वास बढ़ा है, जो इस परंपरा को जीवित रखने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
असम की जनता की ओर से आभार व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि यह सम्मान बुनकरों के लिए प्रोत्साहन का काम करता है और उनके शिल्प कौशल के महत्व को रेखांकित करता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख मंचों पर गमोसा को मिली पहचान आजीविका को बनाए रखने और असम की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने में सहायक है।
‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम की शुरुआत 2018 में एक टाउनहॉल संवाद के रूप में हुई थी और अब यह देश के सबसे बड़े शिक्षा-केंद्रित कार्यक्रमों में से एक बन चुका है, जिसका उद्देश्य परीक्षा से जुड़े तनाव को कम करना और छात्रों, शिक्षकों व अभिभावकों के बीच संवाद को बढ़ावा देना है।
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