असम जल आपूर्ति की प्रमुख सरकारी योजना जल जीवन मिशन के तहत शिकायतों के मामले में देश में दूसरे स्थान पर है। इससे राज्य में योजना के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।
राज्यसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार, असम से कुल 1,226 शिकायतें दर्ज की गई हैं। इस सूची में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है, जहां सबसे अधिक शिकायतें सामने आई हैं। देशभर में इस योजना के तहत कुल 18,790 शिकायतें दर्ज की गई हैं।
असम से आई शिकायतों में मुख्य रूप से वित्तीय अनियमितताएं, निर्माण कार्य की खराब गुणवत्ता और गैर-कार्यशील नल कनेक्शन जैसी समस्याएं शामिल हैं। ये शिकायतें आम नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, मीडिया रिपोर्ट्स और आधिकारिक शिकायत पोर्टलों के माध्यम से सामने आई हैं।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना ने कहा कि पेयजल आपूर्ति की जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्य सरकारों की होती है, जबकि केंद्र सरकार योजना के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करती है।
साल 2019 में शुरू की गई जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है। सरकार के अनुसार, अब तक देशभर में 12.5 करोड़ से अधिक घरों को इस योजना से जोड़ा जा चुका है और 80 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल का पानी मिल रहा है।
हालांकि, अधिकारियों ने माना कि असम जैसे राज्यों में कठिन भौगोलिक परिस्थितियां, बिखरी हुई आबादी और जल स्रोतों की कमी या प्रदूषण जैसी चुनौतियां योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में बाधा बन रही हैं।
केंद्र सरकार ने योजना के शेष कार्यों को पूरा करने के लिए इसकी समयसीमा दिसंबर 2028 तक बढ़ा दी है।
असम में शिकायतों की बढ़ती संख्या यह संकेत देती है कि योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए बेहतर निगरानी, गुणवत्ता नियंत्रण और शिकायत निवारण प्रणाली को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
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