लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के शीर्ष नेता और हाफिज़ सईद के करीबी सैफुल्लाह कसूरी ने खुले तौर पर पाकिस्तान सेना के साथ संगठन के रिश्तों को स्वीकार किया है। पहलगाम आतंकी हमले के मास्टरमाइंड और LeT के डिप्टी चीफ कसूरी ने दावा किया कि उसे नियमित रूप से पाकिस्तान सेना के कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जाता है और यहां तक कि वह सेना के जवानों की अंत्येष्टि की नमाज़ भी पढ़ाता है।
कसूरी ने ये बयान पाकिस्तान के एक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बच्चों को संबोधित करते हुए दिए। सामने आए एक अप्रकाशित (अनडेटेड) वीडियो में वह भारत को लेकर भड़काऊ बयान देता नजर आ रहा है। उसने दावा किया,
“क्या आप जानते हैं कि भारत मुझसे डरता है?”
वीडियो में कसूरी कहता है, “पाकिस्तान सेना मुझे औपचारिक निमंत्रण भेजकर बुलाती है… और अपने सैनिकों की जनाज़ा नमाज़ पढ़ाने के लिए भी आमंत्रित करती है।”
उसके ये बयान आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान सरकार के बार-बार किए गए दावों के विपरीत हैं। कसूरी की सार्वजनिक स्वीकारोक्ति न सिर्फ प्रतिबंधित आतंकी संगठनों और पाक सेना के बीच सांठगांठ को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि ऐसे समूहों को किस स्तर तक संरक्षण और समर्थन मिलता रहा है।
कसूरी ने भारत के खिलाफ उकसावे भरे बयान जारी करते हुए ऑपरेशन सिंदूर का भी ज़िक्र किया। उसने माना कि भारत की इस कार्रवाई में पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में आतंकी ढांचे को नुकसान पहुंचा, लेकिन साथ ही धमकी भरे लहजे में कहा कि भारत ने “गलती” की है।
वह यह कहते हुए भी सुना गया कि लश्कर “कश्मीर मिशन से कभी पीछे नहीं हटेगा।”
एक अन्य वीडियो में कसूरी ने डींग हांकते हुए कहा कि उसे पहलगाम आतंकी हमले का मास्टरमाइंड बताए जाने से वह “दुनियाभर में मशहूर” हो गया है।
पंजाब प्रांत के कसूर में एक रैली के दौरान उसने कहा,“मुझ पर पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड होने का आरोप लगा, अब मेरा नाम पूरी दुनिया में मशहूर हो गया है।”
गौरतलब है कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मौत हुई थी। इसके जवाब में भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू करते हुए पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इसके बाद चार दिनों तक ड्रोन और मिसाइलों के जरिए सीमा पार से तीव्र संघर्ष चला।
आखिरकार 10 मई को भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष रोकने को लेकर एक समझ बनी।
कसूरी के ताजा बयानों ने एक बार फिर पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी नेटवर्क और वहां की सैन्य संरचना के बीच कथित रिश्तों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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