41 साल बाद भी ‘विक्रम और बेताल’ का जादू कायम, IMDb रेटिंग 8.3 पर

41 साल बाद भी ‘विक्रम और बेताल’ का जादू कायम, IMDb रेटिंग 8.3 पर

साल 1985 में दूरदर्शन पर आया टीवी शो ‘विक्रम और बेताल’ भारतीय टेलीविजन का इतिहास बदल गया। यह शो 41 साल पहले शुरू हुआ था और इसे आज भी दर्शक उतनी ही श्रद्धा और पसंद से याद करते हैं। 26 एपिसोड्स में यह शो मनोरंजन के साथ-साथ नैतिक शिक्षा, बुद्धि और जीवन के सबक भी देता था।

‘विक्रम और बेताल’ की कहानी राजा विक्रमादित्य और बेताल के इर्द-गिर्द घूमती है। राजा को बेताल को अपने कंधे पर लटकाकर ले जाना होता है, और रास्ते में बेताल 25 कहानियां सुनाता है। हर कहानी के अंत में बेताल राजा से एक कठिन सवाल पूछता है। यदि राजा सही जवाब देता है, तो बेताल गायब हो जाता है; अन्यथा राजा को फिर से शुरुआत करनी पड़ती थी।

इस शो की सबसे खास बात यह थी कि इसमें रामायण-महाभारत के सभी पात्रों ने भूमिकाएं निभाईं। अरुण गोविल, जिन्होंने श्रीराम का किरदार निभाया था, इस शो में राजा विक्रमादित्य बने। इसके अलावा दीपिका चिखलिया (सीता माता), सुनील लहरी (लक्ष्मण), अरविंद त्रिवेदी (रावण), विजय अरोड़ा, मूलराज राजदा, रमेश भटकर और कई अन्य प्रसिद्ध कलाकार इसमें नजर आए।

शो ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि बच्चों और बड़ों को अच्छाई और बुद्धिमत्ता के मूल्य भी सिखाए। उस समय टीवी ही मुख्य मनोरंजन का साधन था, और दर्शक रविवार की सुबह का बेसब्री से इंतजार करते थे।

41 साल बाद भी ‘विक्रम और बेताल’ के एपिसोड यूट्यूब पर देखे जाते हैं और इसका जादू आज भी कायम है। IMDb पर इसका रेटिंग 8.3 है, जो इस शो की स्थायी लोकप्रियता को दर्शाता है।

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