गैर-प्रवासी कश्मीरी पंडितों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक संगठन ने संदिग्ध आतंकी समूहों से मिली कथित धमकियों के बीच समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए “निर्णायक निवारक कदम” उठाने की मांग की है। इस बीच प्रशासन उस कथित संदेश की प्रामाणिकता की जांच कर रहा है जो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है।
Kashmiri Pandit Sangarsh Samiti (KPSS) ने कहा कि उसने सोशल मीडिया पर एक पत्र साझा किया है, जिसके बारे में दावा किया गया कि वह The Resistance Front (TRF) से जुड़े एक धड़े द्वारा जारी किया गया है। संगठन ने टीआरएफ को पाकिस्तान समर्थित आतंकी प्रॉक्सी बताया। हालांकि, पत्र की प्रामाणिकता स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सकी है।
केपीएसएस ने कहा कि यह कथित धमकी “कश्मीर में शांति और साम्प्रदायिक सौहार्द को कमजोर करने की सोची-समझी कोशिश” हो सकती है और इससे अल्पसंख्यक समुदाय में भय का माहौल बन सकता है। संगठन ने सुरक्षा व्यवस्था में संभावित कमियों पर चिंता जताते हुए प्रशासन से सुरक्षा तंत्र मजबूत करने की अपील की।
भाजपा नेता Sunil Sharma ने कहा कि उन्होंने भी कथित पत्र देखा है, जिसमें कश्मीरी प्रवासियों और नागरिकों को निशाना बनाने की चेतावनी दी गई है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय 1990 जैसा नहीं है और प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
केपीएसएस ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों United Nations Human Rights Council, Amnesty International और Human Rights Watch से भी कश्मीर में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रमों पर नजर रखने का आग्रह किया है। साथ ही संगठन ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से स्वतः संज्ञान लेने की भी मांग की।
प्रशासन की ओर से अभी इस कथित पत्र पर विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है और इसकी सत्यता की जांच जारी है।
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