असम के कछार जिले के पैलापूल में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की प्रतिमा कथित तौर पर अज्ञात लोगों द्वारा गिरा दी गई, जिससे राजनीतिक बवाल और गिरफ्तारी की मांग उठ गई। यह घटना 23 फरवरी की देर रात हुई, जहां प्रतिमा कई वर्षों से पूर्व राष्ट्रीय नेता के सम्मान का प्रतीक बनी हुई थी।
स्थानीय कांग्रेस नेताओं के अनुसार, यह घटना आकस्मिक क्षति नहीं बल्कि जानबूझकर की गई ध्वंसकारी कार्रवाई थी। पैलापूल मर्चेंट एसोसिएशन की निगरानी में बाजार क्षेत्र में लगे CCTV कैमरों ने प्रतिमा को एक्सकेवेटर से गिराते हुए दृश्य कैद किए, जबकि निवासी सो रहे थे। पार्टी नेताओं का दावा है कि फुटेज इस घटना की योजनाबद्ध प्रकृति को स्पष्ट रूप से दिखाता है।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, लक्षिपुर मंडल इकाई ने घटना की कड़ी निंदा की और इसे केवल प्रतिमा पर हमला नहीं बल्कि स्वतंत्र भारत के निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाने वाले नेता की विरासत पर हमला बताया। मंगलवार को पार्टी ने लक्षिपुर पुलिस स्टेशन में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई और दोषियों की तत्काल पहचान और गिरफ्तारी तथा उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।
पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप कुमार देय ने पत्रकारों से कहा कि यह कार्रवाई स्पष्ट इरादे के साथ की गई थी। उन्होंने कहा कि पूरी घटना की श्रृंखला निगरानी कैमरों में कैद है और पुलिस से शीघ्र कार्रवाई की अपील की। देय ने चेतावनी दी कि अगर दो दिनों के भीतर आरोपी गिरफ्तार नहीं किए गए, तो लक्षिपुर कांग्रेस बड़े आंदोलन की शुरुआत करेगी।
इस घटना ने ध्वंस के पीछे राजनीतिक प्रेरणा के संभावित कारणों को लेकर व्यापक अटकलें बढ़ा दी हैं। कुछ निवासी मानते हैं कि यह किसी बड़े एजेंडे के तहत हो सकता है, जबकि अन्य इसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के प्रति असहिष्णुता का चिंताजनक संकेत बता रहे हैं। कई लोगों ने आश्चर्य व्यक्त किया कि किसी पूर्व प्रधानमंत्री की प्रतिमा को इस तरह निशाना बनाया जा सकता है।
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