वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर अमेरिका की नजर अब और तेज हो गई है। अमेरिकी प्रशासन ने अरबों डॉलर के निवेश की योजना बनाकर वेनेजुएला के तेल भंडार को निकालने का दावा पेश किया है। देश की जमीन में लगभग 300 अरब बैरल से ज्यादा तेल समाहित है, जो मुख्यतः ओरिनोको बेल्ट में पाया जाता है। यह तेल “भारी खट्टा कच्चा” कहा जाता है, जो गाढ़ा और चिपचिपा होने के कारण रिफाइनिंग में अधिक ऊर्जा और संसाधनों की मांग करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वेनेजुएला का तेल पारंपरिक तरीकों से निकाला जाता है। इसमें भाप पंप का उपयोग कर तेल को पिघलाना पड़ता है और फिर इसे कुएं से बाहर निकाला जाता है। इसके बाद इसे गैसोलीन, डीजल और अन्य उत्पादों में बदलने के लिए भी भारी मशक्कत लगती है। इस प्रक्रिया में मीथेन रिसाव, आग लगने का खतरा और प्रदूषण काफी बढ़ जाता है।
यदि अमेरिका वेनेजुएला का पूरा तेल निकाल लेता है और रिफाइन करता है, तो इसके सीधे असर जलवायु परिवर्तन पर पड़ेगा। अमेरिका दावा कर रहा है कि उसके पास बेहतर रिफाइनिंग तकनीक है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा का रिफाइनिंग करना न केवल पर्यावरणीय बल्कि आर्थिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण होगा।
वेनेजुएला पर पहले भी अमेरिका के हमले और राजनीतिक हस्तक्षेप की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इस तेल भंडार पर दावा अब न केवल वैश्विक ऊर्जा राजनीति का हिस्सा है बल्कि जलवायु सुरक्षा और पर्यावरणीय जोखिमों को भी चुनौती दे रहा है।
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