भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अपनी विदेशी परिसंपत्ति रणनीति में अहम बदलाव करते हुए अमेरिकी ट्रेज़री बॉन्ड में निवेश को घटा दिया है। RBI ने पिछले एक वर्ष में अमेरिका के ट्रेज़री बॉन्ड में अपनी हिस्सेदारी 50 अरब डॉलर से अधिक कम कर दी है, जिससे अब इसकी कुल होल्डिंग 200 अरब डॉलर से नीचे आ गई है।
इसके साथ ही भारत ने अपने स्वर्ण भंडार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। देश का गोल्ड रिज़र्व बढ़कर लगभग 880 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है, जो वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश की दिशा में कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम भारत की विदेशी परिसंपत्तियों में रणनीतिक विविधीकरण (डाइवर्सिफिकेशन) का संकेत देता है, जिससे डॉलर आधारित परिसंपत्तियों पर निर्भरता कम की जा सके।
हालांकि परिसंपत्तियों के इस पुनर्संतुलन के बावजूद भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार स्थिर बना हुआ है और यह करीब 685 अरब डॉलर के स्तर पर है। RBI का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के दौर में रिज़र्व की स्थिरता और मजबूती बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है।
यह रणनीति भारत की वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करने और बाहरी आर्थिक झटकों से निपटने की तैयारी को दर्शाती है।
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